स्वर्णाकर्षण भैरव साधना: जन्मों की दरिद्रता नाश का सूक्ष्म विज्ञान – विधि, मंत्र और लाभ

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जो वाकई बड़े आदमी बनना चाहते हैं वे यह साधना कर लें।

मनचाहा धन पाना सबकी चाहत होती है। ऐसे में इस तरह की साधनाएं चमत्कार जैसी परिस्थितियां प्रदान करती हैं। राम चरित मानस में लिखा है – दरिद्रता से बड़ा कोई दुख नहीं होता।

दरिद्रता के अनेकों रूप होते हैं। कुछ लोग बहुत कमाते हैं, फिर भी घर खर्च चलाना मुश्किल होता है। कमाया धन ब्याज, व्याधि, विवादों में चला जाता है। इन लोगों को तिल-तिल छटपटाते जीवन बिताने की बजाय आध्यात्मिक पुरुषार्थ जगाना लेना चाहिये। इसके लिये युगों से स्वर्णाकर्षण भैरव साधना बहुत प्रभावी सिद्ध हुई है।

हमने आज तक ऐसा साधक नहीं देखा जिसने विधान पूर्वक इसे अपनाया हो, फिर भी मनचाहा धन न पाया हो। इसके परिणाम वाकई बड़े ही उत्साह जनक होते हैं।

यह साधना कब और कौन करे?

यह साधना विशेष रूप से उन लोगों के लिए है –

  • जिनके धन कमाने के जीवन भर के प्रयास विफल रहे हैं
  • दरिद्रता और कर्ज की पीड़ा जिनका पीछा नहीं छोड़ रही
  • लक्ष्मी, कुबेर की साधनाएं भी जिन्हें धन न दे सकीं
  • मेहनत, योग्यता के बाद भी जिनका धन, सम्मान भंग है
स्वर्णाकर्षण भैरव साधना: जन्मों की दरिद्रता नाश का सूक्ष्म विज्ञान - विधि, मंत्र और लाभ
स्वर्णाकर्षण भैरव साधना: जन्मों की दरिद्रता नाश का सूक्ष्म विज्ञान – विधि, मंत्र और लाभ

स्वर्णाकर्षण भैरव की पौराणिक कथा

एक बार देवताओं का दैत्यों के साथ विवाद हो गया। युद्ध हुआ और लंबा चला। देवताओं के खजाने खाली हो गए। कुबेर, लक्ष्मी तक धनहीन हो गए। त्राहि-त्राहि मच गई।

समस्या का हल ब्रह्मा, विष्णु के पास भी न मिला। उनकी सलाह पर देवता शिव जी के पास गए। देवाधिदेव ने माता लक्ष्मी और कुबेर देव को भैरव जी की विशेष साधना का विधान बताया। साधना स्थल श्री बद्रीनाथ क्षेत्र के पास ऊंचे पहाड़ों के बीच बताया।

माता लक्ष्मी और कुबेर जी ने वहां रहकर कठोर साधना की। स्वर्णाकर्षण भैरव प्रसन्न हुए। अनंत ब्रह्मांड से उत्पन्न करके दोनों देवों के सोने के भंडार भरे। देवता पुनः धनवान बने।

ऐसी ही साधनाओं में से एक स्वर्णाकर्षण भैरव साधना है। इसे नियत विधान से ऊर्जा सम्पन्न क्षेत्र में किया जाए तो मनचाहे धन की परिस्थितियां उत्पन्न होती हैं।

सफलता के लिए जरूरी है – ऊर्जा कनेक्टिविटी अनुष्ठान

स्वर्णाकर्षण साधना की सफलता के लिये अपने आभामंडल की कनेक्टिविटी स्वर्णाकर्षण भैरव जी की ऊर्जाओं के साथ कर लेनी चाहिये।

इसके लिये विशेष अनुष्ठान का प्रावधान है। अपने गुरू या स्वर्णाकर्षण विद्या के किसी जानकार से अनुष्ठान का आग्रह करें। अनुष्ठान सम्पन्न होने पर साधक का सूक्ष्म शरीर स्वर्णाकर्षण भैरव जी के ऊर्जा क्षेत्र से कनेक्ट हो जाता है। तब साधक द्वारा जपे जाने वाले मंत्र की ऊर्जा सीधे स्वर्णाकर्षण ऊर्जा के साथ मिलकर जीवन में स्वर्ण, धन, सम्पत्ति आकर्षित कर लाती है। मान, सम्मान, प्रतिष्ठा भी बढ़ती है।

स्वर्णाकर्षण भैरव साधना विधि

ऊर्जा कनेक्टिविटी अनुष्ठान सम्पन्न होने के बाद किसी शुभ मुहूर्त में साधना आरम्भ करें।

साधना सामग्री: रुद्राक्ष की 108 मनके वाली माला, पीले रंग का आसन, साफ सुथरे कपड़े, देशी घी का दीपक, धूप और मावा पेड़े का भोग।

यह साधना सात्विक है। इसे महिला-पुरुष सभी साधक कर सकते हैं। महिला और पुरुष साधकों के लिये मंत्र अलग-अलग हैं।

1. महिला साधकों के लिये मंत्र:

ॐ ऐं क्लां क्लीं क्लूं ह्रां ह्रीं ह्रूं स: वं आपदुद्धारणाय अजामल वधाय लोकेश्वराय स्वर्णाकर्षण भैरवाय मम दारिद्रय विद्वेषणाय ॐ ह्रीं महाभैरवाय नम:

मंत्र को जप-जपकर याद करें। दिक्कत हो तो लिखकर याद करें और मन ही मन जपें।

2. पुरुष साधकों के लिये मंत्र:

ॐ ऐं ह्रीं श्रीं ऐं श्रीं आपद उद्धारणाय ह्रां ह्रीं ह्रूं अजामिल बधाय लोकेश्वराय स्वर्णाकर्षण भैरवाय मम दारिद्रय विद्वेषणाय महा भैरवाय नमः श्रीं ह्रीं ऐं ॐ

साधना के 10 अहम नियम

1. साधना 7 दिन चलेगी। प्रतिदिन 3 माला मंत्र जप। 108 मनके वाली माला। 7 दिन में 21 माला के बाद 47 दिन तक 1 माला रोज मंत्र जप।
2. साधना के 7 दिनों तक कोई भी दूसरी साधना नहीं करनी है।
3. साधना के दिनों में सात्विक भोजन करना है।
4. साधना के दिनों में गुस्से और आलोचना से बचें।
5. महिला साधक यदि मासिक धर्म से प्रभावित हो जाएं तो साधना तुरंत रोक दें। मासिक पूरा होने के बाद शुभ मुहूर्त में नए सिरे से साधना आरम्भ करें।
6. साधना के लिये अपनी सुविधा का कोई भी टाइम फिक्स कर लें। रोज उसी समय पर साधना करनी है।
7. मंत्र जप आराम से करें। जल्दबाजी में न जपें।
8. साधना के दिनों में रोज किसी गरीब को भोजन दें।
9. साधना के समय देशी घी का दीपक जलाएं, धूप जलाएं और मावा पेड़े का भोग लगाएं।
10. साधना का विधान और मंत्र गोपनीय रखें। किसी के साथ शेयर न करें।

साधना का विधान और संकल्प कैसे करें?

  1. अपनी सुविधा का कोई समय तय कर लें और रोज उसी समय पर साधना शुरू करें।
  2. साधना स्थल को साफ सुथरा रखें। पीला आसन बिछाकर पूरब मुख होकर बैठ जाएं।
  3. 5 मिनट प्राणायाम करें।
  4. फिर श्री गणेशाय नमः बोलकर साधना शुरू करें।
  5. घी का दीपक प्रज्वलित कर लें, धूप बत्ती जला लें और मावा से बने पेड़े का भोग लगाएं।
  6. उसके बाद नीचे दिए संकल्प बोलकर रुद्राक्ष की माला से मंत्र जप शुरू करें।

संकल्प:

1. भगवान शिव को साक्षी बनाएं – कहें – हे देवाधिदेव महादेव मेरे गुरुदेव आपको प्रणाम। आपको साक्षी बनाकर मैं स्वर्णाकर्षण भैरव सिद्धि साधना कर रहा हूँ। मुझे इसकी अनुमति प्रदान करें। सफलता हेतु दैवीय सहायता और सुरक्षा प्रदान करें। स्वर्णाकर्षण भैरव की अनुकूलता प्रदान करें। आपका धन्यवाद।

2. स्वर्णाकर्षण भैरव जी से सिद्धि का आग्रह करें – कहें – हे शिवजी के स्वरूप स्वर्णाकर्षण भैरव जी आपको प्रणाम। भगवान शिव को साक्षी बनाकर मैं आपकी स्वर्णाकर्षण साधना सम्पन्न कर रहा हूँ। इसके लिये मेरे द्वारा किये जा रहे मंत्र जप और साधना को स्वीकार करें, साकार करें। मुझे स्वर्णाकर्षण सिद्धि प्रदान करें। आपका धन्यवाद।

3. मंत्र से साधना सिद्धि का आग्रह करें – कहें – हे दिव्य स्वर्णाकर्षण भैरव मंत्र मेरी भावनाओं से जुड़कर मेरे लिये सिद्ध हों। मुझे स्वर्णाकर्षण भैरव सिद्धि प्रदान करें। आपका धन्यवाद।

4. अपनी शक्तियों से सिद्धियों के लिये सक्षम बनाने का आग्रह करें – कहें – मेरे तन, मन, मस्तिष्क, आभामण्डल, ऊर्जा चक्र, कुंडलिनी शक्ति और 33 लाख से अधिक रोम छिद्रों आपको नमन। आप सब स्वर्णाकर्षण भैरव मंत्र के साथ जुड़ जाएं। इनके बीज मंत्रों को अपने भीतर स्थापित कर लें। मेरे साथ मिलकर इस मंत्र का जप करें। ब्रह्मांड से दैवीय ऊर्जाओं को ग्रहण करके अपने भीतर धारण करें और मुझे स्वर्णाकर्षण भैरव सिद्धि अर्जित करने में सक्षम बनाएं। आपका धन्यवाद।

5. मंत्र से सिद्धि का आग्रह करें – कहें – हे दिव्य स्वर्णाकर्षण भैरव मंत्र आपको नमन। आप मेरी भावनाओं से जुड़कर मेरे लिये सिद्ध हो जाएं और मुझे स्वर्णाकर्षण भैरव सिद्धि अर्जित करने की दैवीय ऊर्जायें प्रदान करें। आपका धन्यवाद।

रोज ऐसा बोलकर मंत्र जप शुरू करें।

शिव शरणं।

स्वर्णाकर्षण भैरव साधना क्या है और यह क्यों की जाती है?

स्वर्णाकर्षण भैरव साधना भगवान शिव के रुद्र अवतार भैरव की एक प्राचीन और सात्विक साधना है। यह साधना जन्मों की दरिद्रता, लगातार कर्ज, कमाया हुआ धन टिकता न होना और व्यापार में रुकावट को दूर करने के लिए की जाती है। ऐसा माना जाता है कि स्वयं माता लक्ष्मी और कुबेर देव ने भी अपना खजाना भरने के लिए यही साधना की थी।

क्या महिला भी स्वर्णाकर्षण भैरव साधना कर सकती है?

हाँ, यह पूरी तरह से सात्विक साधना है। इसे महिला और पुरुष दोनों कर सकते हैं। दोनों के लिए मंत्र अलग-अलग हैं। महिला साधकों के लिए मंत्र है – ॐ ऐं क्लां क्लीं क्लूं… महाभैरवाय नम:। यदि साधना के बीच में मासिक धर्म आ जाए तो साधना तुरंत रोक देनी चाहिए और शुद्ध होने के बाद शुभ मुहूर्त में नए सिरे से शुरू करनी चाहिए।

स्वर्णाकर्षण भैरव साधना कितने दिन की होती है?

मुख्य साधना 7 दिन की होती है, जिसमें रोज 108 मनके वाली रुद्राक्ष माला से 3 माला जप करना होता है। यानी 7 दिन में कुल 21 माला। इसके बाद 47 दिनों तक रोज 1 माला का जप करना अनिवार्य है ताकि ऊर्जा आपके आभामंडल में स्थायी हो जाए।

ऊर्जा कनेक्टिविटी अनुष्ठान क्या है? क्या इसके बिना साधना सफल होगी?

साधना से पहले अपने आभामंडल को स्वर्णाकर्षण भैरव की ऊर्जा से जोड़ना ही ऊर्जा कनेक्टिविटी अनुष्ठान कहलाता है। मान्यता है कि इस अनुष्ठान के बिना जपा गया मंत्र सीधे उस ऊर्जा क्षेत्र से नहीं जुड़ पाता। इसलिए सफलता के लिए किसी जानकार गुरु या मृत्युंजय योग संस्थान से यह अनुष्ठान करवाना जरूरी बताया गया है।

साधना के लिए किस माला और आसन का उपयोग करना चाहिए?

इस साधना के लिए केवल रुद्राक्ष की 108 दानों वाली माला का ही उपयोग करें। आसन पीले रंग का होना चाहिए और पूरब दिशा की ओर मुख करके बैठना चाहिए। साधना के समय देशी घी का दीपक, धूप और मावा के पेड़े का भोग लगाना आवश्यक है।

पुरुष साधकों के लिए स्वर्णाकर्षण भैरव मंत्र कौन सा है?

पुरुष साधकों के लिए मंत्र है:
ॐ ऐं ह्रीं श्रीं ऐं श्रीं आपद उद्धारणाय ह्रां ह्रीं ह्रूं अजामिल बधाय लोकेश्वराय स्वर्णाकर्षण भैरवाय मम दारिद्रय विद्वेषणाय महा भैरवाय नमः श्रीं ह्रीं ऐं ॐ
मंत्र का जप आराम से, बिना जल्दबाजी के और मन ही मन करना चाहिए।

साधना के दौरान किन नियमों का पालन करना जरूरी है?

साधना के 7 दिनों में सात्विक भोजन करें, गुस्सा और किसी की आलोचना करने से बचें, किसी दूसरी साधना को न करें, रोज एक ही निश्चित समय पर जप करें और रोज किसी गरीब को भोजन दान दें। साधना का मंत्र और विधान गोपनीय रखना चाहिए।

स्वर्णाकर्षण भैरव साधना का शुभ मुहूर्त कौन सा है?

साधना किसी भी शुभ मुहूर्त, शुक्ल पक्ष की अष्टमी, पूर्णिमा या गुरु पुष्य योग में शुरू की जा सकती है। सबसे महत्वपूर्ण है कि ऊर्जा कनेक्टिविटी अनुष्ठान के बाद ही शुभ मुहूर्त देखकर इसे शुरू किया जाए।

क्या लक्ष्मी और कुबेर साधना विफल होने पर यह साधना कर सकते हैं?

हाँ, यह साधना विशेष रूप से उनके लिए बताई गई है जिनकी लक्ष्मी और कुबेर साधनाएं भी विफल हो गई हों। ग्रंथों के अनुसार जब देवताओं के खजाने खाली हो गए थे और कुबेर-लक्ष्मी भी धनहीन हो गए थे, तब शिव जी ने ही उन्हें इस साधना का विधान बताया था।

डिस्क्लेमर (अस्वीकरण)

अध्यात्मिक जानकारी हेतु सूचना:

  1. फल की गारंटी नहीं: साधना की सफलता साधक की श्रद्धा, विश्वास, नियम-पालन, पिछले कर्मों और व्यक्तिगत प्रयासों पर निर्भर करती है। हम किसी भी प्रकार के धन लाभ, चमत्कार या निश्चित फल की गारंटी नहीं देते हैं।
  2. अंधविश्वास नहीं, आध्यात्मिक पुरुषार्थ है: यह लेख किसी भी तरह के अंधविश्वास को बढ़ावा नहीं देता। इसे आध्यात्मिक पुरुषार्थ और सकारात्मक ऊर्जा के एक माध्यम के रूप में ही देखें, न कि मेहनत और कर्म के विकल्प के रूप में।
  3. गुरु मार्गदर्शन जरूरी: किसी भी मंत्र साधना को शुरू करने से पहले अपने गुरु या किसी जानकार आचार्य से परामर्श अवश्य लें। बिना उचित मार्गदर्शन और ऊर्जा कनेक्टिविटी अनुष्ठान के मंत्र जप न करें।
  4. सामान्य जानकारी: इस लेख में दिए गए मंत्रों का उच्चारण और विधि में त्रुटि हो सकती है, इसलिए विवेक का उपयोग करें। किसी भी असुविधा या हानि के लिए लेखक या वेबसाइट जिम्मेदार नहीं होगी।

हमारी सलाह है कि आप कर्म को प्रधान रखें और साधना को कर्म के साथ जोड़कर ही करें। शिव शरणं।

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